चांद कितना दूर
- Heart touching shayri, Hindi Poetry, Poetry

चांद कितना दूर

है अगर चाँद, दूर धरती से तो क्या
उसे देख तो सकता हूँ
बादलों का पहरा है तो क्या
इंतज़ार तो कर सकता हूँ
आस-पास के तारों को देखना जरा मुश्किल है
आकार बदल कर तुम अपना,
दीदार तो कर सकता हूँ
है अगर चाँद, दूर धरती से तो क्या
उसे देख तो सकता हूँ
दाग है तुझमें तो क्या
नज़र तो उतार सकता हूँ ….
खुद की न रौशनी तो क्या
अंधेरे में तो चल सकता हूँ
है अगर चाँद, दूर धरती से तो क्या
उसे देख तो सकता हूँ ….
तू चलता हुआ प्रतीत होता है तो क्या
अफवाह पर विश्‍वास तो कर सकता हूँ
बीच में हे तेरे एक तारा तो क्या
अमन की बात तो कर सकता हूँ
छाननी लिए वो तेरा इंतज़ार करती है तो क्या
चाँद क्या होता है ? एहसास तो कर सकता हूँ ….

Written By – Suresh

About Jhavinder

My name is Jhavinder Thakur. I am a student right now. I am doing blogging as a part time. Here i am sharing my personal experience of blogging and some information regarding the blogging or website design.
Read All Posts By Jhavinder

Leave a Reply

Your email address will not be published.